1008 गुरु श्री टेकचन्द जी महाराज की आरती
गुरुधाम कड़छा
।। श्री गणेशाय नमः ।।
यह आरती जूना गुजराती दर्जी समाज (दामोदर वंशीय) के आराध्य देव और परम पूज्य संत शिरोमणि 1008 श्री टेकचंद जी महाराज की है।
गुरु महाराज की तपोभूमि और समाधि स्थल गुरुधाम कड़छा (जिला उज्जैन, म.प्र.) में स्थित है, जो समाज के हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है।
भक्तजन श्रद्धा और भक्ति भाव से गुरु महाराज की यह आरती गाकर अपने कष्टों के निवारण और जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।
॥ आरती: 1008 संत श्री टेकचंद जी महाराज ॥
ॐ जय गुरुदेव हरे, ॐ जय गुरुदेव हरे,
दीनजनों के संकट, तुम गुरु दूर करें।
(ॐ जय गुरुदेव हरे…)
पुण्य पयोनिधि पावन, आलरी (झोंकर) की धरती,
हर्ष विभोर धरा ने, गोदी निज भर दी।
(ॐ जय गुरुदेव हरे…)
लता पुष्प लहराये, सरस समय आया,
सुमन गंध अंजलि भर, श्रद्धानत लाया।
(ॐ जय गुरुदेव हरे…)
एक अलौकिक क्षण था, बिखरी नव आभा,
गुरु के चरण परत ही, दुख विषाद भागा।
(ॐ जय गुरुदेव हरे…)
रुकमणी अंक किलोलित, उदय गोद खेले,
प्रमोदित मात-पिता हो, बालक चाल चले।
(ॐ जय गुरुदेव हरे…)
दामोदर कुल हर्षित, गुरु प्रसाद पाया,
पावन स्वर गुरुवर का, नवजीवन लाया।
(ॐ जय गुरुदेव हरे…)
कलि कुल कलुष सने है, मुक्ति कौन करे,
अगम भाव भावन को, अभिनव आन धरे।
(ॐ जय गुरुदेव हरे…)
कलयुग कलुष मिटाने, कड़छा मन भाया,
साधि साधना तुमने, हटि गहन माया।
(ॐ जय गुरुदेव हरे…)
जान अकिंचन हमको, ज्ञान चक्षु दे दो,
भव सागर तर जावें, बीज मंत्र कह दो।
(ॐ जय गुरुदेव हरे…)
शरण पड़े हम तेरी, अवलंबन प्रभु दो,
उभय लोक सुखकारी, वरद हस्त धर दो।
(ॐ जय गुरुदेव हरे…)
हीरा तो पत्थर हैं, चमक तुम्हीं देते,
मोह जड़ित जड़ मन को, ज्योतित कर देते।
(ॐ जय गुरुदेव हरे…)
विनय भाव जो जन, गुरु महिमा गावे,
आनंदित हो जीवन, भव से तर जावे।
ॐ जय गुरुदेव हरे, ॐ जय गुरुदेव हरे,
दीनजनों के संकट, तुम गुरु दूर करें।
गुरुधाम कड़छा कैसे पहुँचें? (How to Reach)
यदि आप दर्शन के लिए आना चाहते हैं, तो यहाँ सही स्थान की जानकारी दी गई है:
स्थान: ग्राम कड़छा (Kadchha), जिला उज्जैन (मध्य प्रदेश)।
मार्ग: यह स्थान उज्जैन-देवास रोड पर स्थित है।
लैंडमार्क: नरवर (Narwar) से अंदर जाने का रास्ता है (लगभग 6-7 किमी)।
नजदीकी रेलवे स्टेशन: कड़छा (Karchha) – यह उज्जैन-इंदौर रेलवे लाइन पर स्थित है।
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